देखें किसान आंदोलन क्या बचा है अब समाधान

M  विद्वान पुरुष जैसे अपने शरीर की रक्षा वे देखरेख करता है वैसे ही राष्ट्र की रक्षा राजा को करनी चाहिए


जैसे विवेक वान मनुष्य पूरे शरीर की देखभाल बुद्धि के साथ करता है जैसे अगर बुद्धिमान पुरुष के शरीर का कोई अंग बीमारी से ग्रस्त हो जाए या किसी अन्य को सेप्टिक आदि हो जाए बुद्धिमान पुरुष अच्छे डॉक्टर को दिखाता है 2 चार डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद अगर रोग असाध्य हो और पूरे शरीर को नष्ट कर सकता हो तो पूरे शरीर की रक्षा के लिए उस अंग को शरीर से निकलवाने में जरा भी देर नहीं करता क्योंकि उसे पता है शरीर अंग से अधिक महत्वपूर्ण है इसलिए वह सेप्टिक वाले अंग को बिना देर किऐ तत्काल ही निकलवा देता है

ऐसे ही राजा को भी राष्ट्र के किसी क्षेत्र में अगर भयानक अराजकता या असाध्य बीमारी जिसका समाधान ना हो सके उस क्षेत्र को सेप्टिक होए अंग की तरह निकाल फेंकना चाहिए नीति भी यही कहती है पूरे शरीर की रक्षा के लिए किसी एक अंग को निकालने में देरी नहीं करनी चाहिए ऐसे ही एक परिवार की रक्षा के लिए एक मनुष्य की बलि देने में नहीं हिचक ना चाहिए एक पूरी कॉलोनी की रक्षा के लिए एक घर का महो नहीं करना चाहिए प्रांत की रक्षा के लिए जिले को नहीं देखना चाहिए देश की रक्षा के लिए प्रांत अगर अड़चन हो तो पूरे प्रांत को नष्ट कर देना चाहिए यही सही नीति है आज राष्ट्र पर ऐसी ही भयानक दुखदाई स्थिति किसान आंदोलन के रूप में खड़ी हो गई है जितना इलाज कराना था रोग का उससे अधिक हो गया है अब तो राष्ट्र में यह आंदोलन कहीं सेप्टिक का रूप ना ले ले उससे पहले ही इसका समाधान कर देना चाहिए इसमें शक्ति का प्रयोग भी करने में नहीं हीचकना चाहिए भले ही कोई जनहानि हो जाए जिस राष्ट्र में कानून की व्यवस्था तहस-नहस करने वाले लोगों पर दया करने वाला शासक होगा वह राष्ट्र निश्चित ही नष्ट हो जाएगा इसलिए उत्तम शासक को चाहिए जब रोग असाध्य हो जाए तब उसे कैसे भी करके उस रोक का समन करना चाहिए यही सुंदर नीति है जो नीति मनुष्य के शरीर पर लागू होती है वही नीति राष्ट्र पर भी लागू होती है इसी को सुंदर नीति कहते हैं

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