महान कृषि वैज्ञानिक धरतीपुत्र डॉक्टर रामधन सिंह जी की जयंती पर नमन करते हुए विकास पवार भारसी

 *महान कृषी वैज्ञानिक धरतीपुत्र डा रामधनसिंह जी की जयंती पर नमन !*



नमन "हरित क्रांति "के अग्रदूत विश्व विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ रामधनसिंह जी को ज़िन्होने दुनिया मे  हरित क्रांति से 40 साल पहले भारत मे हरित क्रांति की नीव रखी !


1 मई 1891 में रोहतक जिले के किलोई गांव में साधारण किसान के घर जन्मे और लंदन कैम्ब्रिज से  प्राकृतिक विज्ञान और कृषि में  Ph. D करने के बाद 1925 में Punjab Agriculture College and Research Institute ,Layallpur में प्रिंसिपल लगे 1947 में रिटायरमेंट तक वहीं रहकर भारत ही नही दुनिया के लिए फसलो की नई किस्में इज़ाद की( गेहूं,जौं,धान, दाल,गन्ना आदि )।


केनेडा  और मेक्सिको  आदि  ने सबसे पहले उनकी  गेहूं C-591 अपनाई और पैदावार के रिकॉर्ड बनाये।

C-217,C-228 250,253,273,281और C-285,C 518 C-591 आदि  उनकी मुख्य गेहूं की किस्मे थी !


जिस C-306 गेहूं को आज भी सबसे स्वादिष्ट माना जाता है उसे डॉ रामधन सिंह जी ने इज़ाद किया था।

संसार में मशहूर बासमती चावल 370 और झोना- 349 भी डॉ रामधन जी की ही देन है।


उनके योगदान का अंदाजा यों लगा सकते हो ,जिसको Mexico से नोबल पुरस्कार विजेता डॉ नोरमन बोरलोग  1963 में डॉक्टर रामधन सिंह जी से मिलने उनके घर पर आएं और रामधन सिंह जी के पैर छू कर कहें '''आपने संसार को बेहतर किस्में देकर 100 करोड़ लोगों को भूखे मरने से बचा लिया""!


1965 में लाल बहादुर शास्त्री जी ने डॉ रामधन सिंह जी को किसी भी राज्य के गवर्नर  बनने के लिए कहा था लेकिन डॉक्टर रामधन सिंह जी ने कहा ''राज्यपाल बनने से ज्यादा भला मैं वैज्ञानिक के तौर पर कर सकता हूँ देश का''' और उन्होंने ऐसा किया भी।


1961 में पाकिस्तान ने डॉ रामधन सिंह जी को राष्ट्रपति गोल्ड मैडल से सम्मानित किया और वह यह सम्मान पाने वाले पहले भरतीय बने।


20 अप्रैल 1977 को डॉ रामधन सिंह जी इस संसार को अलविदा कह गए लेकिन सबको जिंदा रहने के लिए अथाह अनाज भंडार दे गए।


73 साल आजादी के बाद भी आज भारत मे उनकी  गेंहू C-306, बासमाती चावल -370 और गन्ना- 312 ऊगाया  जाता  है और गुणवत्ता के लिये जाना जाता  है ! 


डॉ रामधन सिंह जी अमर रहेंगे !!!💐🙏

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