सरकार की घोषणा विपक्ष के सवाल आखिर चुनाव के समय ही क्यों लेख सुनीता कुमारी


हमारे देश  में सारी घोषणाएं चुनाव से पहले क्यों ,विपक्ष के द्वारा सरकार से सवाल जवाब चुनाव से पहले क्यों??



लेखिका -सुनीता कुमारी 

पूर्णियाँ बिहार 


हमारे देश की शासन व्यवस्था में सत्तापक्ष पक्ष के  द्वारा किए जाने वाले कार्यो की यह बिडम्बना रही है कि,लगभग सारे कार्य चुनावी वर्ष में होते है। देश की आम  जनता, को लाभ पहुंचाने वाली , सारी योजनाओं की घोषणा और कार्यान्वयन आगामी विधानसभा चुनाव  ,या लोक सभा चुनाव से छह महीने पहले या,चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले होती हैं ??

चुनावी वर्ष में ही सत्तापक्ष द्वारा विकास के कार्य तथा आम जनता को लाभ पहुंचाने वाली, तरह तरह की लाभ पहुंचाने वाली घोषनाएं होती है।सरकारी नौकरी के लिए वैकेन्सी की घोषणा ,बहाली की प्रकिया ,रोजगार के लिए सुविधाए आदी ,आम जनता से जुड़े हुए लगभग सारे कार्य  ,चुनावी वर्ष में ही होते है क्यों??

यह बात कही न कही देश के सत्तापक्ष के कार्य करने के तरीके पर सवाल खड़ी करती है ??

विधान सभा हो या लोकसभा हो चुनाव में जीत हासिल करने के बाद चार साल तक सरकार सोचने में लगी रहती है कि,आम जनता की सुविधाओं के लिए, रोज़गार के लिए, आम जनता के विकास के कौन कौन से कार्य करने है??

उसका ढांचा तैयार होता है फिर पांचवे वर्ष में घोषणा होती है ,लागू किए जाते है ??

जो घोषनाएं लागू नही हो पाती है  , इसके लिए सरकार के द्वारा जनता से अनुनय विनय के द्वारा अगले पांच साल और मांगे जाते है??

हमारे देश में आम जनता से जुड़े सारे कार्य चुनावी वर्ष के मुहताज है ?इसलिए विकास की प्रकिया धीमी और हमारा देश विकासशील देश है।

उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड , पंजाब ,मणिपुर ,गोवा इन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं । इन पांचों राज्यों में 15 मार्च से 14 मई तक विधानसभा का कार्यकाल पूरा हो रहा है ।इस कारण 2022 की शुरुआत में इन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं।

 इसके लिए चुनाव आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव आयोग ने इन पांचों राज्यों का दौरा शुरू करनेवाली  है ।

आने वाले साल 2022 की शुरुआती दिनों में चुनाव की तारीखों का एलान होने वाला है । पांचो प्रदेश उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा के साथ साथ देश की राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ गई है।

 देशों के पांचो राज्य में विधान सभा चुनाव की तैयारी राजनीतिक पार्टी और जनप्रतिनिधियों ने शुरू कर दिया है।उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक सरगर्मी जोड़ पकड़ चुका है। 

पूरे देश की नजर उत्तर प्रदेश की विधानसभा चुनाव पर है।क्योंकि अन्य राज्यों की अपेक्षा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक का सीधा सम्बन्ध दिल्ली से होता है। देश के सारे शीर्षस्थ राजनीतिक पार्टी भाजपा ,कांगेस, समाजवादी पार्टी के सारे शीर्ष के नेता चुनाव प्रचार में शामिल होते है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे है।उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार के द्वारा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के द्वारा किए गए,उत्तर प्रदेश में विकास के कार्यो का ब्योरा जनता को दिया जा रहा है। सरकार के द्वारा जनता को अवगत कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री के द्वारा महिला तथा पुरूषो के हित के लिए कई घोषणा की गई है।

गृहमंत्री अमितशाह भी उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे है ।परंतु चुनाव से तुरंत पहले ??क्या केंद्र या राज्य सरकार के द्वारा किये जाने वाले सारे कार्य चुनाव को ध्यान में रखकर क्यों किए जाते है??

क्या सत्तापक्ष के द्वारा सारे कार्य चुनाव को ही ध्यान में रखकर किये जाते है??

क्यों राजनितिक पार्टी के लिए देश के विकास, आम जनता की सुखसुविधाओ से ज्यादा ,पार्टी का विकास ज्यादा जरूरी है ।उससे भी ज्यादा पार्टी से जुड़े नेताओ के विकास से है।

लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना भी अतिआवश्यक है ।विपक्ष यदि कमजोर हो तो सरकार तानाशाह बन जाती है ।हमारे देश में विपक्ष भी मात्र राजनीति करने के लिए ही रह जाती है ।

विपक्ष का कार्य सरकार के द्वारा किए जानेवाले कार्यो का ब्योरा लेना तथा इसकी खबर आम जनता तक पहुचाना। सरकार के कार्यो पर नजर रखना तथा सरकार के द्वारा किए जानेवाले कार्य पर नजर रखना तथा गलती होने पर टोकना।

मगर हमारे देश के लोकतंत्र में विपक्ष इसलिए होती है कि,सरकार के द्वारा किए जानेवाले हर कार्य का विरोध करे ,हर कानून का विरोध करे ,चाहे वह कार्य देश हित में ही क्यों न हो।

हद तो तब होती है जब ,विपक्ष भी सरकार के द्वारा किए जाने वाले कार्य का ब्योरा भी चुनावी वर्ष में ही लेती है??

उत्तर प्रदेश में यही दृश्य दिखाई दे रहा है ।कांगेस, समाजवादी पार्टी आदि पूरी ताकत लगाकर उत्तर प्रदेश में हुए कार्यो का ब्योरा सरकार से मांग रही है। कांगेस की ओर  से रैली हो रही है रोड सो हो रहे है??

सरकार से जबाव मांगा जा रहा है,वो भी तब जब ,उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव होनेवाले है।हमारे देश की राजनीति में चाहे पक्ष हो या विपक्ष 

सारे कार्य मात्र राजनीतिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए करते है।

बहुत ज्यादा जरूरी है कि,हम आम जनता राजनीतिक साजिश को समझे और सही नेता का चुनाव करे।

Popular posts
चार मिले 64 खिले 20 रहे कर जोड प्रेमी सज्जन जब मिले खिल गऐ सात करोड़ यह दोहा एक ज्ञानवर्धक पहेली है इसे समझने के लिए पूरा पढ़ें देखें इसका मतलब क्या है
सफाई कर्मचारियों को नियमित कराने के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन
Image
संविदा व ठेके पर नगर पालिका में सफाई कर्मियों को परमानेंट कराने हेतु मुख्यमंत्री के नाम डीएम को ज्ञापन अरविंद झंझोट
Image
आदि अनार्य सभा पश्चिम उत्तर प्रदेश के रामस्वरूप बाल्मीकि संचालक नियुक्त
Image
महर्षि बाल्मीकि पर आप नेता ने की अभद्र टिप्पणी बाल्मीकि समाज में रोष अरविंद झंझोट
Image