भारत में निंबू के साथ कहीं यह खेल तो नहीं हो रहा मेहरबान खान

 नींबू के साथ कहीं खेल तो नही हो रहा 

आपको ध्यान होगा कि

1974 में जब विदेशी ड्राई मिल्क पाउडर (सूखा दूध) जब मार्केट में आया तो कोई नही खरीद रहा था।

ये कम्पनियां बर्बाद होने को थी।

तब इन्होंने BAD MARKETING का एक घटिया तरीका निकाला।

उन्होंने रोज़ाना मार्केट से सारा दूध चुपचाप से खरीद के नालियों में फिकवाना शुरू कर दिया।

लोगों के पास सूखा दूध खरीदने के अलावा कोई और विकल्प नही बचा।

लगभग तीन महीने ये गंदा खेल चलता रहा। बाद में वही विदेशी प्रोडक्ट मार्केट में डिमांड पे आ गया।

सूखे दूध के दाम भी बढ़ाए और सारा खर्चा निकाल लिया। *1974 के बाद अब नींबू महंगा होने के पीछे कहीं कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों की यही ट्रिक तो नहीं।* 


*मंथन कीजिएगा ।* 


*पिछले 2 सालों में कोका कोला, पेप्सी को भारत में बहुत घाटा हुआ और आज भी इन अमेरिकी केमिकल वाली बोतलों को कोई नहीं खरीद रहा।* 


*कहां जा रहे है नींबू? किसानों से तो आज भी 25 से 30 रू किलो ही खरीदे जा रहे हैं फिर भी मार्किट में 10 गुना ज्यादा दाम पर कैसे बिक रहे हैं। इन विदेशी कोल्ड ड्रिंक की चाल को समझिए और शिकंजी की जगह गन्ने का जूस, नारियल पानी, गुलाब रस, बेल शर्बत और आम पन्ना पिएं और पिलाएं। नींबु 1 महीने में ही 50 रू पर आ जाएगा।*


*स्वदेशी अपनाओ, अमेरिकी कोल्ड ड्रिंक भगाओ।भगाओ।*


जय हिन्द 🚩

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