महान आविष्कारक शख्सियत स्व डॉ रामबख्श सिंह
स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  

आविष्कारक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  द्वारा बायोगैस एवं गोबर गैस प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट / अनुपम कार्य और योगदान रहा ।
बताते चले कि कि गैर-परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  ने बायोगैस और गोबर गैस की उपयोगिता के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  का जन्म वर्ष 1925 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था । स्व. डॉ. राम बक्श सिंह वर्ष 1963 में एशिया इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट, दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया तत्पश्चात वर्ष 1979 में पेसिफ़िक वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, कैलिफ़ोर्निया से मैकेनिकल इंजीनियरिंगकी परास्नातक डिग्री प्राप्त करने के उपरान्त आपको अक्षय-उर्जा में अनवरत शोध एवं कार्य में योगदान के लिए पैसिफिक वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया द्वारा मास्टर ऑफ एप्लाइड साइंस और डॉक्टर ऑफ टेक्नोलॉजिकल फिलॉसफी  की मानद् उपाधि प्रदान की गई । उनका सम्पूर्ण शिक्षा अवधि के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा ।  
 शैक्षिक ज्ञानार्जन एवं व्यक्तिगत शोध अनुभव द्वारा न केवल भारतवर्ष अपितु विश्व के 15 देशों में अक्षय-उर्जा के सम्वर्धन, विकास एवं प्रसार के दिशा में अभूतपूर्व कार्य करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की तथा विश्व के प्रमुख शख्सियतों के बीच भारतीय वैज्ञानिक के रूप में एक अलग पहचान बनाई साथ ही इस दिशा में "गोबर बायो-गैस" में "गोबर" से मीथेन गैस के उत्सर्जन तथा उसे इकट्ठा करने की संरचना के विषय पर कार्य करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित की, जिसे वर्ष 1966 में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय (मंत्रिमंडल कार्य विभाग), राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली तथा वर्ष 1964 में भारत के प्रधान मंत्री सचिवालय, नई दिल्ली से उनके द्वारा किये गये असाधारण खोज एवं अनुसंधान कार्य के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया । इसके साथ-साथ कई विदेशी सरकारों और वैज्ञानिक संस्थानों तथा बायोगैस और गोबर गैस के क्षेत्र से जुड़े शिक्षा संस्थानों द्वारा उनके कार्यों को सराहा गया और उन्हें प्रशंसा पत्र प्राप्त हुए है ।
1950 के दशक के दौरान, वैज्ञानिक स्वयं डॉ. राम बक्स सिंह ने 09 सितंबर 1957 को ग्राम रामनगर, जिला सीतापुर, उत्तर प्रदेश, भारत में भारत का पहला 'गोबर गैस' संयंत्र (अपनी तरह का अनूठा) डिजाइन और स्थापित किया (नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र दिनांक 13.10.1957 में प्रकाशित लेख)। उसके बाद, वर्ष 1960 में, उन्होंने भारत के उत्तर प्रदेश के अजीतमल (तब इटावा जिले में) में एशिया का पहला "गोबर गैस अनुसंधान स्टेशन" स्थापित करने में योगदान दिया, जिसमें डॉ. राम बक्स सिंह ने अनुसंधान कार्य किया और संचालन किया। यह और वह इस केंद्र के प्रभारी (लगभग 16 वर्ष) थे।
यह कहना  अतिश्योक्ति नही होगी कि अब तक भारत में बायोगैस एवं गोबर गैस पर जो भी काम हुआ है उसका श्रेय वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  को ही जाता है, आपने गोबर के अलावा वनस्पति आदि से भी बायोगैस एवं गोबर गैस की प्रौद्यौगिकी / रासायनिक विधि का आविष्कार किया जिससे न केवल खाद बनाने की प्रक्रिया में किण्वन और अपघटन को गति दी, साथ ही  एक मूल्यवान ज्वलनशील गैस का निर्माण किया । स्व. डॉ. राम बक्स सिंह  ने दो सौ से अधिक कम लागत वाले डाइजेस्टर विकसित किए, जो पौधों और जानवरों के कचरे को खाद उर्वरक और ईंधन के लिए मीथेन में परिवर्तित करने के लिए डिज़ाइन किए थे जिसे भारत सहित 15 से अधिक देशों में बायोगैस एवं गोबर गैस संयंत्र स्थापित किये गये ।
अजीतमल-इटावा, उत्तर प्रदेश स्थित बायोगैस और गोबर गैस संयंत्र में किये जा रहे अनुसंधान एवं शोध कार्य को  वी.वी. गिरी गुजरात के तत्कालीन गवर्नर, मा0  डॉ.  नारायण , उत्तर प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर मा0 अली अक़बर ख़ाँ, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री, सी.बी. गुप्ता, प्रमुख पोषण कार्यक्रम (भारत), यूनिसेफ {पोषण कार्यक्रम प्रमुख (भारत), यूनिसेफ} डॉ. राम दास, तथा तत्कालीन मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, सतीश चंद्र द्वारा व्यक्तिगत रूप से भ्रमण कर वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  द्वारा बायोगैस और गोबर गैस की दिशा में किये जा रहे शोध का अवलोकन कर जानकारी ली एवं उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों को सराहा । 
वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  द्वारा भारत और विदेशों में 40 वर्षों के काम के दौरान डेनमार्क, ईरान, जर्मनी, नेपाल, अमेरिका, सीलोन, हॉलैंड, कनाडा, मैक्सिको, निकारागुआ, होंडुरस, कोस्टा रिका, पनामा और इक्वाडोर आदि जैसे 15 देशों में 1000 से अधिक बायोगैस और गोबर गैस सिस्टम को डिजाइन विकसित और स्थापित करने का अवसर मिला । संयुक्त राज्य अमेरिका में राल-जिम-फार्म, बेन्सन, वर्मोंट जून 1972 में पहला बायो-गैस संयंत्र बनाया गया, जिसका उद्घाटन अलास्का के सीनेटर माइक ग्रेवेल ने किया । आपने भारतवर्ष और विदेश के हर जिले और गाँव में उच्च स्तर पर बायोगेस और गोबर गैस उर्जा के उत्सर्जन की दिशा में लोगो में जागरूकता बढाने की मुहीम चलाई थी । बायोगैस और गोबर गैस की दिशा में किये गये शोध को देखते हुए स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  को संयुक्त राष्ट्र (संयुक्त राष्ट्र)) द्वारा 03 बार बायोगैस सलाहकार के रूप में प्रतिनिधित्व किया । 
 आविष्कार, अनुसंधान और विकास कार्य और उपलब्धियो को यू.एस. सीनेट ने                            यू.एस. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव सीनेट में कार्यवाही (कार्यवाही) में चर्चा का विषय रहा । साथ ही विश्वविद्यालयों और दुनिया भर में कई अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक संस्थानों में उनके प्रौद्योगिकी को मान्यता दी गयी, इन सभी का उल्लेख समाचार पत्रों, वेबसाइट्स, मैगजीन, वैज्ञानिक पत्रिकाओं और पुस्तकों में वर्णित है और दर्ज किया गया है, और इसे वर्तमान में भी देखा जा सकता है ।
भारत और विदेशों में इस दिशा में किये जा रहे अनुसंधान और बायोगैस व गोबर गैस प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर विस्तृत जानकारी को आपने 07 पुस्तकों में समाहित किया जिसे स्वयं आप द्वारा लिखा गया । यह पुस्तकें भारत, यू.एस. लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस वाशिंगटन डी.सी. एवं अन्य देशों के राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुमोदित हैं, और यह सभी पुस्तके विश्वविद्यालयों और दुनिया भर में आज भी पढ़ायी और पढ़ी जाती हैं ।  
जब समूचा विश्व स्वच्छ उर्जा (ग्रीन एनर्जी) अथवा गैर परंपरागत उर्जा के उत्सर्जन एवं उपयोग व इसके स्रोत पर हर अंतरराष्ट्रीय मंचों में इस विषय को गंभीरता से ले रहा है और भारत सरकार भी इस दिशा में तेज़ी के साथ काम कर रही है, तथा हाल ही में जर्मनी में सम्पन्न हुए G7 बैठक में भी हरित ऊर्जा गठबंधन और शून्य कार्बन उत्सर्जन की महत्ता को भारत के प्रधान मंत्री  द्वारा वैश्विक मंच पर उल्लेखित किया गया है ऐसे में वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  जिन्होने अपनी ऊर्जा और सारा समय देश हित में गैर-परंपरागत ऊर्जा बायोगैस एवं गोबर गैस के शोधकर्ता के रूप में समर्पित किया तथा अमेरिकी सरकार द्वारा प्रद्त यू.एस. ग्रीन कार्ड के बावजूद उन्होंने भारत में ही रहने का निर्णय लिया तथा ग्रामीण भारत की उर्जा उपयोगिता में आत्मनिर्भरता तथा ग्रामीण भारत के सत्तत विकास के कार्य करते रहे । दिनांक 18.सितंबर .2016 को वैज्ञानिक स्व. डॉ. राम बक्श सिंह  ने लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में अन्तिम सांस ली ।
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