भाई ईश ऑस्ट्रेलिया कीखबर जरुर देखे और फीर समझ कर मुझे भी समझाऐ आप का अपना भाई मनोज पवार आंखों देखे ऑस्ट्रेलियामेनमाज पढ़ते कुछ मुसलमानों को दिखाया गया है और उनके हवाले से खबर प्रकाशित की गई है के देखो मुसलमानों की नवाज पढ़ने में कितनी ताकत है कि अल्लाह तुरंत ही बारिश करा देते हैं और जो आग बुझाई नहीं बुझ रही थी वह बुझ जाती है क्या गजब है इसमें कोई दो राय नहीं अल्लाह तो जो चाहेगा वह कर देगा परंतु अगर वह नवाज पढ़ने के बाद ही करेगा फिर वह कई साअल्लाह हैजो और इससे एक बात और भी साबित होती है कि जहां भी आग लग रही है वहां अल्लाह ही लगा रहा है और उसे बुझाने का काम नवाज पढ़ने वालों का है तो आग जैसी बुराई के मूल में वह मुल्लाह है जो नवाज पढ़ते हैं क्योंकि उन्होंने यह नवाज जब आस्ट्रेलिया में भयंकर आग लगी और जानवर लोग मर रहे थे महीनों तक चली आ वह नवाजी उस समय कहां थे क्या उन्हें पता नहीं था के अल्लाह इस आग को बुझा एगा और अगर उन्हें पता था तो फिर इतनी देर नवाज पढ़ने में क्यों लगाई या फिर ऐसा भी समझा जा सकता है कि इतने दिनों तक उन्होंने नवाज ही नहीं पड़ी और एक बात अगर अल्लाह किसी को उसके गलत कर्मों का फल आग लगा कर देता है तो फिर जितनी भी मोमडन कंट्री है देश है चाहे सीरिया हो इराक हो या और अन्य कोई भी काफी मुसलमान देश है पाकिस्तान वगैरा इनमें जो आग लग रही है इनमें क्यों आग लग रही है यहां तो नवाजी हर रोज नमाज पढ़ते हैं इसका मतलब यह है के यहां पाप हो रहा है और अल्लाह क्रुद्ध होकर आग लगा रहा है फिर क्या बचकानी बात है इसका मतलब यह नहीं कि मैं अल्लाह की ताकत या प्रभाव पर शक कर रहा हूं अल्लाह परमात्मा का प्रभाव तो अनंत है उनके प्रभाव की कोई सीमा नहीं है जो चाहे वह कर सकते हैं परंतु मैं ऐसे मति नमाजियों को यह कहना चाहता हूं अरे भाई अगर तुम्हें पता लग गया है कि नमाज पढ़ने से ऐसा होता है आग बुझ जाती है तो फिर दुनिया में फायर ब्रिगेड सर्विस को ही बंद कर देना चाहिए धार जिले शहर में 50 100 नवाजी नमाज पढ़ने के लिए होनी चाहिए जब आग लगे दिल्ली के अंदर एक फैक्ट्री में आग लगी उसमें सारे के सारे नवाजी ही मारे गए थे यह मूर्खता भरी बातें समाज के कल्याण की नहीं है अल्लाह क्या करता है कब करता है क्यों करता है वही जाने तुम्हारे नवाज पढ़ने से वह खुश नहीं होगा और तुम्हारे नमाज ना पढ़ने से वह दुखी नहीं होगा कुरूद नहीं होगा यह तो आप का मसला है आप पढ़ो या ना पढ़ो परमात्मा अल्लाह तू समरूप से सब को देखता है उसके लिए ना कोई अपना और ना कोई पराया है वह तो समुद्र एसटी से सभी को निहारता रहता है और सच कहूं तो उस अल्लाह को नहीं पता कि मेरा नाम अल्लाह है यह अल्लाह नाम धरने वाले भी आप ही लोग हो परमात्मा नाम गॉड नाम वाहेगुरु बहुत ही भांति के नाम देने वाले तो आप ही लोग हो उसे उसका कोई भी नाम नहीं है ना कोई रूप है वह तो सभी रूपों में समाहित अरूप ही हे वह निराकार निर्गुण वियापक सत्ता धारी परमात्मा या अल्लाह अपनी जान कारी में दुनिया भी हे असा सोचता भी नहीं वह तो खुद में खुदी सब कुछ बना हुवा हे उसको असे समझे जैसे कीसी का नाम अब्दुला हे सब लोग भी अब्दुल्ला नाम से पुकारते हे पर अब्दुल्ला जानता हे की मेरा नाम अब्दुल्ला तो दुनिया में आने के बाद में रखा गया उससे पहले के नाम का तो पता नहीं अब यह बात यहां पर ही छोड़े कुछ और नामों पर नजर डालें तो उसका नाम रमलु का बेटे नाम से भी पुकारा जाता है रमजानी का पोता नाम भी सलमा का भाई नाम से भी ईश अब्दुल्ला को जाना जाता हे पर सच में अब्दुल्ला का नाम से क्या यह कोई भी नहीं जानता अब बात सोचने की यह से की जिस जीव रूपी देहे धारी रूह नाम से कुरान में पुकारे जानेवाली जनत वासनी रूहु को खुद का नाम भी जमीन पर रेंगने वाले सुवारथि लोभी मुड़ लोगों से मीला हैं और डींगे मारते हे खुदा के नाम को जानने की कि उसका नाम अल्लाह हे
सीरत पढते वक्त मुनाफिको के षडयंत्रों को समझने कासिर रहे हो वो मौजूदा दौर के दुश्मन के खेमों में खेलते ऐसे लोगों को देखकर अपनी वो कचाश पूरी करे और अपने मिशन में और तेजी से सक्रिय हो जाए।
दुश्मन अपना काम करे
मुनाफिक दुश्मन का काम करे
और
हमे अपना काम करना होगा।
आजमाईश कुछ अवसर भी फराहम कराती है जैसा कि हमे कब पता चलता कि हमारी सफो में ऐसे *तकवादी* है जो *आतंकवादी* दुश्मनो से मिलकर अपने मफाद के लिए कौम को बेचने पर उतारू गद्दार भी है।
हमे कब पता चलता कि हमारी हिमायत में चिल्ला चिल्लाकर हमारे जेब खाली करनें वाले बोल बच्चन मुकर्रिर जो तकरीरे करतें करतें कब हमारे काइद बन गये पता ही नहीं चला, लेकिन आजमाईश के वक्त में उनकी असलियत उजागर हुई कि जिन को हम शेर समझते थे वो मैदान में कहीं भी दिखाई नहीं देते।
आजमाईश हमें भी अपने मकसदो और इरादों में पुख्ता करतीं हैं और हमारे कमिटमेन्ट को बढाती हैं।
आजमाईश हमें वो कुछ हासिल करने का होसला दिलाती है जिस के बारें में हम कभी सोचते नहीं थे।
आजमाईश ही तो है जो मिक्ष हुई धातुओं को अलग करती है और सोने व पितल के फर्क की नुमाईश करतीं हैं।