कोरोना सारी दुनिया को बता दिया विपत्ति काल में हर कोई अकेला होता है परमात्मा ही सच्चा दोस्त होता है फिर भी मुसीबत में जो काम आए वह भी मित्र के तुल्य ही होता है

 लेख


*सच्चे मित्र वही होता है जो विपत्ति में साथ दे*


*लेखिका दीप्ती डांगे, मुम्बई*



पिछले डेढ़ साल से पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी से जूझ रही है।कोरोना वायरस हर रोज म्युटेंट हो रहा है। जिसके कारण ये इतना अधिक आक्रामक हो चुका है की दुनिया मे इसकी दूसरी, तीसरी और चौथी लहर चल रही। इसके प्रभाव से कोई भी नही बच रहा चाहे बच्चा हो या बूढ़ा, इंसान हो या जानवर। भारत मे भी कई वैरियंट के साथ कोरोना की दूसरी लहर चल रही है जो पहले से ज्यादा आक्रामक हो गयी है। जहां पहली लहर में हर दिन कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा एक लाख से कम था वो आंकड़े दूसरी लहर में 24 घंटे में चार लाख तक पहुँच गए। सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई। किसने सोच था कि भारत जिसने  ह्युमेनिटी फर्स्ट पॉलिसी को अपनाते हुए पिछले वर्ष पूरी दुनिया को कोरोना महामारी से लड़ने में सबकी मदद की उनको दवाईयां दी,"वैक्सीन मैत्री" कार्यक्रम के तहत वैक्सीन बनाकर 82 से ज्यादा देशों को उम्मीद की रोशनी दिखाई।पूरी दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया और अपना मुरीद बनाया।उसको भी कोरोना की दूसरी लहर में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी कल्पना शायद ही विश्व बिरादरी ने कभी की होगी।लेकिन इस संकट के समय में कुछ भी नामुमकिन नहीं।भारत खुद दवाईया और ऑक्सीजन की कमी से जूझने लगा। भारत के कोरोना संक्रमित एक-एक सांस के लिए जद्दोज़हद करने लगे, तब भारत के एहसान का कर्ज चुकाने के लिए दुनिया के तमाम देश पहली पंक्ति में खड़े हुए। जो खुद इस बीमारी से जूझ रहे थे।वो भारत को मदद करने लगे अपनी क्षमता के अनुसार ।

दुनिया भर के देशों ने भारत को ऑक्सीजन संकेंद्रक, वेंटिलेटर और जीवन रक्षक दवाओं समेत अत्यावश्यक चिकित्सकीय सामग्री मुहैया कराई जिसमे फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, बेल्जियम, रोमानिया, लक्समबर्ग, पुर्तगाल, इस्राएल, जापान और स्वीडन समेत कई देशों ने तत्काल भारत को मदद देने की घोषणा की है। फ्रांस ने तो भारत के लिए ‘‘एकजुटता अभियान’’ की घोषणा की जिसके तहत उसने ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, वेंटीलेटर्स और अन्य चिकित्सा सामान भेजे।ऐसा क्या अमेरिका,क्या रूस और क्या फ्रांस-जर्मनी, क्या सऊदी अरब सबने हिंदुस्तान के कोरोना ग्रस्त मरीज़ों को बचाना अपना मकसद बना लिया था।मददगारों मे केवल विकसित राष्ट्र ही नही थे बल्कि विकाशील देश जैसे कतर, भूटान, थाईलैंड, भी मदद के सामने आए।

शायद ये इतिहास मे पहली बार ऐसा हो रहा होगा जब राजनीति और स्वार्थ से ऊपर उठकर सब एक दूसरे की मदद कर रहे हो। ये हमारे देश के लिए गौरव की बात थी हमने सच्चे दोस्त पाए, देश की इमेज दुनिया मे बनी, लाखो देकर हमने करोड़ो पाया।लेकिन देश के अंदर इतने बुरे समय में भी विपक्ष,टूलकिट गैंग, लिबरल, मीडिया गंदी राजनीति खेल रहा है।देश को बरगलाने की कोशिश कर रहा है।देश को बदनाम करने की कोई कसर नही छोड़ रहे। गंदी राजनीति का स्तर इतना निम्न हो गया कि कोरोना के एक वैरिएंट को "इंडियन वैरिएंट" का नाम देने की बात करने लगे।आज दुनिया का हर देश कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ पर हर देश के नेता हो या मीडिया या जनता हो सभी ने मिलकर एक दूसरे का साथ दिया। किसी भी देश की मीडिया ने ये नही दिखाया कि बॉडीज को दफनाने की फ़ोटो दुनिया को नही दिखाई, कितने लोग बेरोजगार हुए है पर विपक्ष ने सरकार से सवाल नही किया न ही उसपर राजनीति की, कही का विपक्ष सोशल मीडिया पर सरकार की बुराई नही कर रहा, कही भी जरूरी दवाईयों की कालाबाजारी नही हो रही। कोई सरकार पर कीचड़ नही उछाल रहा और खुद का विज्ञापन नही कर रहा। पर ये सब हमारे देश मे भारत का विपक्ष, स्वार्थी, और लिबरल लोग जो देश को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है। इसके लिये विदेशी मीडिया तक का भी साथ ले रहे है।पर केंद्र सरकार की विदेश नीति ने फिर एक बार फिर इनके मंसूबो पर पानी फेर दिया। और एक बार इन लोगो का असली चेहरा लोगो के सामने आ गया। इन लोगो की हरकतों से देश को एक बार फिर समझ आ गया ये कभी नही सुधर सकते।

सच कहा है सच्चे मित्र वही होता है जो विपत्ति में साथ दे।और सच्चाई ये है कि दुनिया हमारी दोस्त बन सकती है लेकिन देश के अंदर बैठे स्वार्थी तत्व कभी देश के नही हो सकते।

प्रस्तुति रिपोटर चंद्रकांत सी पूजारी

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