छात्रो पर पुलिस बर्बरता सत्ता का बेरहम चेहरा विपक्ष भी गैर जिम्मेदार जेपी आंदोलन की याद ताजा अचल जैन

 छात्रों पर पुलिस की बर्बरता सत्ता का क्रूर चेहरा

दिखा रही है परंतु यह भी सच है जब जब सरकारों में ऐसा करो वह बार जनता के साथ किया है वह बड़े आंदोलन का सबब बना है ऐसे स्वतंत्र भारत में छात्रों का सबसे बड़ा आन्दोलन जयप्रकाश नारायण के समय हुआ था। उसमें छात्रों की भूमिका इतनी अधिक थी कि उसे जेपी आंदोलन के साथ साथ छात्र आंदोलन भी कहा गया। उस आन्दोलन के बाद सरकार बदली, राज्यों की सत्ता में भी उस आंदोलन से निकले नए योद्धा काबिज हो गए। पर छात्रों को क्या मिला? कुछ नहीं! बिहार में ही 20 वर्षों तक सारी नियुक्तियां ठप्प रही और एक पूरी पीढ़ी तबाह हो गयी।


तब लोकतांत्रिक भारत में पहली बार लगा कि छात्रों के बल पर भी सरकार बनाई और गिराई जा सकती है, सो सारे दलों ने अपने अपने छात्र संगठन खड़े कर लिए। पर सच यही है कि कांग्रेस हो या भाजपा, सपा-बसपा हो या राजद-जदयू, तब से अब तक सबने छात्रों को ठगा ही है।


कल से बिहार और यूपी में छात्रों पर चली लाठियों की तस्वीरें और वीडियो देख रहा हूँ। जो लाठियां लाल किले पर चढ़ कर झंडा फाड़ देने वाले गद्दारों पर न चल सकीं, वह छात्रों पर कहर बन कर टूट रही थीं। जिन लड़कों के साथ संवाद होना चाहिए था, उन्हें बर्बाद किया जा रहा था।


जितना मैं समझ पा रहा हूँ यह मुद्दा इतना भी बड़ा नहीं था, कि बिना लाठी भांजे इसका हल नहीं निकलता। इसको शान्ति पूर्ण तरीके से भी सुलझाया जा सकता था। पर इन सरकारों ने जाने कैसे मूर्खों के हाथ में व्यवस्था की डोर थमाई है, जो बच्चों के हाथ पैर तोड़ने में लग गए... बिना झिझक के कह सकता हूँ, बहुत बुरा है यह! बहुत ही बुरा...


नौटंकी देखिये, एक ओर निर्मम हो कर छात्रों पर लाठियां बरसाने वाली सत्ता होती है, और दूसरी और होता है उन्हें उकसा कर रेल की पटरी उखाड़ने और आग लगाने को उकसाने वाला विपक्ष! हालांकि सच यह भी है कि देश में एक भी दल ऐसा नहीं जिसने सत्ता में रहते छात्रों पर लाठियां न चलवाई हों, पर विपक्ष में रहते समय सारे ही दल छात्रों के हितैशी होते हैं। यह भारत के सारे राजनैतिक दलों की नंगई है।


कुछ दिन रात रजाई में सोते सोते सत्ता को उखाड़ फेंकने का स्वप्न देखने वाले निर्लज्ज लोग भी हैं जो छात्रों के कंधे पर ही हथियार रख कर अपना काम निकालना चाहते हैं। स्वयं पढ़ाई और तैयारी के नाम पर दस वर्ष दिल्ली- इलाहाबाद में रह कर पिता के दो चार बीघे बिकवा देने वाले विद्वान भी है, जो असफलता का झेंप मिटाने के लिए बलिया-बनारस दौड़ते और वेव पोर्टल्स के लिए आर्टिकल लिख कर क्रांति करते हैं, उन्हें भी इसी आग में अपनी रोटी सेंक लेनी है। मैं पूछता हूँ तुम क्यों नहीं आते सड़कों पर? सरकार को उखाड़ना है तो अपने पिछवाड़े का जोर लगाओ भाई, क्यों दूसरे के बच्चों का भविष्य बिगाड़ रहे हो?


यकीन कीजिये, जितनी बुरी छात्रों पर लाठी चलवाने वाली सरकार है, उतने ही बुरे हैं ये धूर्त जो घर से इलाहाबाद पढ़ने गए छात्रों को आग लगाने की शिक्षा देते हैं।


मैं यूपी सरकार से जरूर उम्मीद करता हूँ कि लाठी चार्ज के सारे दोषी अधिकारियों को दंडित करे। खबरों में देखा कि कुछ छात्रों पर केस दर्ज हुए हैं। बकवास निर्णय है यह! बेहतर होता कि उन धूर्तों, अर्बन नक्सलियों, गद्दारों पर केस दर्ज किए जाते जो अपने हितों के लिए छात्रों को भक्सी झोंकते हैं।


#साभार

Popular posts
चार मिले 64 खिले 20 रहे कर जोड प्रेमी सज्जन जब मिले खिल गऐ सात करोड़ यह दोहा एक ज्ञानवर्धक पहेली है इसे समझने के लिए पूरा पढ़ें देखें इसका मतलब क्या है
13 दिसंबर स्वामी विद्यानंद गिरी महाराज की पुण्यतिथि प्रवर्तन योद्धा मोहन जोशी के जन्मदिन पर विशेष महावीर संगल जी
Image
अकबर महान पढा पर एक सच्चाई जो छुपाई गई देखें इस लेख में पवन सिंह तरार
Image
इस लड़की का नाम अमृता कुमारी और पिता का नाम ब्रह्मा प्रसाद है कुशीनगर के पास जंगल चौरी गांव की रहने वाली है कोई लड़का बहका कर सिवान लेकर चला गया
Image
दिल्ली पुलिस पूर्वी जिला एटीएस का चोरों पर कसते शिकंजे से जनता को राहत
Image