जज ने कहा... संभव है बचने के लिए गाड़ी भगाई हो और किसान कुचले गए
क्या देश की अदालतें अनुमान ज्ञान पर चलती है जनता को पूंजीपतियों अदालतों के विषय में और जनता को ठग रहे राजनीतिक लोगों के विषय में गंभीरता से विचार करने का समय आ गया है अगर जनता अभी भी नहीं चेती तो समझो आने वाला समय अदालत पूंजीपति नौकरशाहों भ्रष्ट
राजनेताओं की संपूर्ण गुलामी के हाथों में चला जाएगा राष्ट्र
लखनऊ
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कांड में अभियुक्त बनाए गए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। जस्टिस राजीव सिंह की एकल पीठ ने गुरूवार को अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर में आरोप है कि आशीष मिश्रा गाड़ी की बाईं सीट पर बैठकर गोली चला रहा था व उसकी गोली से गुरविंदर सिंह नाम के एक शख्स की मृत्यु भी हुई। जबकि मृतकों अथवा घटनास्थल पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को गोली की चोट नहीं आई है। घटना में पांच लोगों की मृत्यु और 13 लोग घायल हुए
हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों के बयान का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने टिप्पणी भी की है कि अगर अभियोजन की पूरी कहानी को स्वीकार किया जाए तो स्पष्ट है कि घटनास्थल पर हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद थे। ऐसे में यह भी सम्भव है की है।
कि कि ड्राइवर ने बचने के लिए गाड़ी भगाई हो और यह घटना घटित हो गई। याची की ओर से दलील भी दी गई थी कि प्रदर्शनकारियों में कई लोग तलवारें और लाठियां लेकर जमा थे। बहस के दौरान यह भी कहा गया था कि ऐसा कोई भी साक्ष्य एसआईटी ने नहीं संकलित किया है जिससे यह साबित हो सके कि आशीष मिश्रा ने गाड़ी चढाने के लिए उकसाया हो। कोर्ट ने आगे कहा कि थार गाड़ी में बैठे तीन लोगों की हत्या को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। केस डायरी के साथ मौजूद फोटोग्राफ्स से पता चलता है कि ड्राइवर हरिओम मिश्रा, शुभम मिश्रा और श्याम सुंदर की हत्या प्रदर्शकारियों ने कितनी निर्दयता से