नव दलित लेखक संघ का संविधान सर्वसम्मति से पारित अमित धर्म सिंह



सघन विवेचना के बाद पारित हुआ नदलेस का संविधान



          दिल्ली। नदलेस के संविधान को अंतिम रूप देने के लिए नव दलित लेखक संघ की अनिवार्य बैठक का आयोजन, दिल्ली विश्विद्यालय के नॉर्थ कैंपस के आर्ट फैकल्टी लॉन में किया गया। बैठक में गहन विवेचन, विश्लेषण और आवश्यक संशोधनों के पश्चात सर्वसम्मति से नदलेस का संविधान पारित हुआ। नदलेस के संविधान का मसौदा, नदलेस के संस्थापक और वर्तमान महासचिव डा. अमित धर्मसिंह ने तैयार किया। संविधान का प्रारंभिक मसौदा 28 सितंबर, 2021 को नदलेस की ही बैठक में प्रस्तुत किया गया था। प्रेक्टिकली अनुभव जोड़ने हेतु उस समय संविधान का प्रकाशन स्थगित कर दिया गया था। गत ग्यारह माह के सांगठनिक और रचनात्मक अनुभवों को जोड़ते हुए, आज संविधान को पारित किया गया। शीघ्र ही इसका प्रकाशन किया जाएगा ताकि संविधान का सांगठनिक उपयोग किया जा सके। बैठक में संविधान का प्रभावी वाचन डा. गीता कृष्णांगी और लोकेश चौहान ने किया। अध्यक्षता डा. अनिल कुमार ने की और संचालन डा. अमित धर्मसिंह ने किया। बैठक में बंशीधर नाहरवाल, कर्मशील भारती, पुष्पा विवेक, डा. अमिता मेहरोलिया, बृजपाल सहज, डा. हरकेश कुमार, सोमी, महिपाल और रोक्सी आदि उपस्थित रहे और संविधान संबंधी विचार अभिव्यक्त किए। उपस्थित साहित्यकारों का धन्यवाद ज्ञापन पुष्पा विवेक ने किया।

          सर्वप्रथम डा. अमित धर्मसिंह ने संविधान के विषय बताया कि यह एक संयोग है कि आज से ठीक ग्यारह माह पहले 28 तारीख (सितंबर, 2021) को संविधान पहली बार प्रस्तुत किया गया था और आज भी 28 तारीख (अगस्त, 2022) को ही प्रस्तुत किया जा रहा है। पहली बैठक और आज की बैठक में उपस्थित रहने वाले सभी सदस्य संविधान समिति के सदस्य बनाए गए हैं जिन्हें कभी बदला नहीं जा सकेगा। संविधान में कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, समितियों और सदस्यों के कर्त्तव्य और अधिकारों संबंधी पच्चीस नियम और उनके पचास उपनियम लिखे गए हैं। प्रस्तावना के अतिरिक्त कार्यकारिणी के न्यूनतम दायित्व और नदलेस के संभावित विस्तार को भी दर्ज किया गया है। संविधान के परिशिष्ट में भारतीय संविधान की प्रस्तावना, बाबा साहब अम्बेडकर की बाइस प्रतिज्ञाएं, बुद्ध धम्म के चार आर्य सत्य, पंचशील, अष्टांगिक मार्ग तथा दस पारमितायें और दोनों संविधान बैठकों की रिपोर्ट शामिल की गई हैं। संविधान में, हर पांच वर्ष उपरान्त संविधान की समीक्षा करने और आवश्यकतानुसार संशोधन करने का भी प्रावधान किया गया है; इस आधार पर संविधान का पुनर्प्रकाशन भी किया जा सकेगा लेकिन संविधान समिति के सदस्यगण, प्रस्तावना और परिशिष्ट के किसी भी भाग को संविधान से कभी भी हटाया नहीं जा सकेगा।

          तत्पश्चात, डा. गीता कृष्णांगी और लोकेश चौहान ने संविधान का प्रभावी वाचन किया। गहन विचार विमर्श और संशोधनों के पश्चात, संविधान सर्वसम्मति से पारित किया गया। पुष्पा विवेक ने कहा कि किसी भी संस्था या संगठन को चलाने के लिए संविधान बहुत जरूरी होता है। नदलेस ने एक वर्ष के भीतर अपना संविधान तैयार किया है जिसके सहारे नदलेस बहुत आगे जा सकेगा। डा. अमिता मेहरोलिया ने कहा कि संविधान में हर पहलू से विचार किया गया है। मुझे नहीं लगता कि इतना विस्तृत और सटीक संविधान, वर्तमान में चल रहे किसी भी संगठन के पास है। अमित भाईसाहब ने बड़ी मेहनत से इसे तैयार किया है जो नदलेस के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं। सोमी ने कहा कि किसी संगठन से जुड़ने का यह मेरा पहला अनुभव है और नदलेस से जुड़कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। संगठनों का ऐसा भी संविधान होता है, यह मैंने पहली बार जाना। संविधान वाकई बहुत अच्छा बना हुआ है। रोक्सी ने कहा कि संविधान का एक-एक नियम और उपनियम पूरी तरह से क्लियर है। पूरा संविधान बड़े ही गहन चिंतन और विस्तृत दृष्टिकोण के साथ लिखा गया है। हमें इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। साथ ही कार्य करने का एक सुव्यवस्थित तरीका भी मिलेगा। डा. हरकेश कुमार ने कहा कि सबसे पहले तो मैं संविधान लिखने वाले डा. अमित धर्मसिंह भाईसाहब को दिल से बधाई देता हूं कि उन्होंने वास्तव में बड़ी मेहनत से संविधान तैयार किया है। हम तो इतना सोच भी नहीं सकते थे, जितना कि संविधान में लिखा गया है। इसे पढ़कर लगता है कि संविधान एक वर्ष की नहीं बल्कि कई वर्षों की मेहनत का परिणाम है।

          कर्मशील भारती ने कहा कि संविधान निश्चित ही बहुत अच्छा बना है, इसके लिए अमित धर्मसिंह बधाई के पात्र हैं, लेकिन जैसा कि बाबा साहब अम्बेडकर ने कहा था कि कोई भी संविधान अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं होता, उसका पालन करने वाले लोग अच्छे या बुरे होते हैं इसलिए नदलेस के इस संविधान की सार्थकता भी तभी है जब नदलेस के तमाम साथी इसका उचित पालन करें। बंशीधर नाहरवाल ने कहा कि मैं कबीर आदि से संबंधित कई संगठनों से जुड़ा रहा हूं लेकिन कभी किसी भी संस्था या संगठन का ऐसा संविधान देखने में नहीं आया। मैंने देखा कि संगठन बस चल रहे हैं, कार्यक्रम भी हो रहे है, हम भी शामिल होते रहे मगर कभी किसी ने संविधान के विषय में नहीं बताया। नदलेस का यह संविधान पढ़कर जाना कि संगठनों का ऐसा भी संविधान हो सकता है। वास्तव में, नदलेस का यह संविधान अपने उद्देश्य और स्वरूप में अति प्रसंशनीय है। बृजपाल सहज ने कहा कि नदलेस के संविधान में, न सिर्फ वर्तमान का ध्यान रखा गया है बल्कि भविष्य का भी पर्याप्त समावेश कर दिया गया है। जिसके सहारे नदलेस न सिर्फ वर्तमान में कार्य कर सकेगा बल्कि भविष्य में भी स्वयं को बचाए और बढ़ाए रखेगा। एक-एक चीज इतनी बारीकी से दर्ज की गई है कि लगता नहीं कि किसी भी स्तर से कहीं कोई चीज़ छूट गई। हो। महिपाल ने कहा कि मैं भी पहली बार ही किसी संगठन से जुड़ा हूं। मुझे इससे जुड़कर ही ज्ञात हुआ कि संगठनों का ऐसा भी कोई संविधान हो सकता है। नदलेस के संविधान को बनाने में बहुत मेहनत की गई हैं। अभी तक जितना भी समझ पाया हूं, उस आधार पर कह सकता हूं कि संविधान वाकई प्रासंगिक और सारगर्भित है। डा. गीता कृष्णांगी ने कहा कि मैं तो संविधान बनने की साक्षी रही हूं। अमित जी ने इसे बनाने में वाकई बहुत मेहनत की है। एक-एक पहलू को कई-कई दिन विचार करने के बाद दर्ज किया है। मुझे नहीं लगता कि हममें से कोई दूसरा इतनी मेहनत कर पाता जितनी कि अमित जी ने की है और साथ में मुझसे करवाई है। अब यह मेहनत तभी सार्थक होगी जब हम सब इसका समुचित पालन करेंगे।

          अध्यक्षता कर रहे डा. अनिल कुमार ने कहा कि नदलेस का संविधान बनने से हमारे पास काम करने का रोडमैप तैयार हो गया है। अब हम और भी बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे। संविधान में बड़ी बारीकी से सभी सदस्यों और पदाधिकारियों के कर्तव्य और अधिकार दर्ज किए गए हैं जिनका पालन करना नदलेस के हर सदस्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। संविधान के माध्यम से हम सब एक दूसरे से और अधिक मजबूती के साथ न सिर्फ जुड़ सकेंगे बल्कि संगठन के उद्देश्य और मूलभावना को भी बचा सकेंगे। नदलेस के रचनात्मक कार्य करने और समाज में वांछित परिवर्तन लाने की दिशा में संविधान मददगार और कारगर साबित होगा। अमित भाई ने नदलेस के संविधान को इतने बढ़िया ढंग से लिखा है कि इनकी जितनी सराहना की जाए, कम है। अंत में, सर्वसम्मति से पारित हो जाने के बाद संविधान की प्रति पर उपस्थित सदस्यों द्वारा स्वीकृत में हस्ताक्षर किए गए। डा. अमित धर्मसिंह ने प्राथमिक प्रति के तौर पर हस्ताक्षरित प्रति, नदलेस के वर्तमान अध्यक्ष डा. अनिल कुमार को सौंपी। उपस्थित सभी साथियों ने संविधान को लोकार्पित करते हुए अंगीकार किया। उपस्थित सभी रचनाकारों का धन्यवाद ज्ञापन नदलेस की वर्तमान उपाध्यक्ष पुष्पा विवेक ने किया।


प्रेषक 

डा. अमित धर्मसिंह

महासचिव, नदलेस।

29/08/2022

9310044324

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