उठो बहादुरने हिंद वक्त की पुकार है वो दोरे शांति गया यह वक्त शांति नहीं फतेह नसीब तुम्भी हो अकेला चीन ही नहीं यह नज्म 15/11/1962 के युद्ध में जावेद अख्तर के पिता अय्यूब हसंन मनंजर कांधला की इस नज्म का ओल इंडिया रेडियो पर प्रसारण कीया गया था


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